चित्रकूट की धरती पर चित्रकूट जनपद के यशस्वी #जिलाधिकारी श्री पुलकित गर्ग की अगुवाई में बरसात की बूंद पकड़ कर तालाबों में आसानी से पहुंचाने , भूगर्भ जल को प्रदूषण से मुक्ति करने के साथ शुद्ध जल का भंडारण का भूजल में बढ़ाने के लिए जल संरक्षण की विशेष पहल समाज के साथ जनवरी 2026 से शुरू हुई।
गोल तालाब सत्याग्रह के तहत श्रमदान स्थल में तालाब का अवलोकन किया तथा सामाजिक पूंजी से चल रहे श्रमदान को सम्मानित किया। #कोठीतालाब सहित महत्वपूर्ण तालाबों पर वह स्वयं जा रहे हैं । तालाबों के प्रदूषित जल को देख रहे हैं। #वाटरबाडी के पुनर्जीवन के लिए सामाजिक ज्ञान को भी जान रहे हैं ! जल धरोहरों के पुनर्जीवन में लगे जल प्रहरियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। वह चित्रकूट के जल ज्ञान को गंभीरता से समझ रहे हैं। जैसे माता अनुसूया ने समझा था।
चित्रकूट विरासत संरक्षण फोरम के #जलप्रहरियों ने कामदगिरि पर्वत के पास स्थानीय #समाजिकपूंजी से बनाए गए ऐतिहासिक #बड़ातालाब और सीतापुर ग्रामीण में भगवान राम के बाण की तरह
#बानतालाब के बारे में सामज के जल ज्ञान को जाना जिसकी संक्षिप्त रिपोर्ट सामाजिक ज्ञान के अनुसार निम्न है-
तालाबों की संक्षिप्त जल ज्ञान रिपोर्ट
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सामाजिक पूंजी से बनने वाले
#तालाब-
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जल ज्ञान यात्रा मे अभी तक चित्रकूट की आस्था से जुड़े दानदाताओं ने जो सबसे बड़ा दान किया था वह था - सामाजिक पूंजी को स्थापित करना। सामाजिक पूंजी मे जल का बहुत बड़ा महत्व है बिना जल के समाज बनेगा ही नहीं। चित्रकूट में भगवान कामतानाथ आस्था के महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु है। इसी पर्वत के आसपास भगवान राम ने निवास किया था। भारत का समाज चित्रकूट आता है और इस तीर्थ के स्वरूप की पूजा करता है। इतना ही नहीं - पर्वत की परिक्रमा लगाता है। हजारों साल से यह परंपरा चली आ रही है।
तभी तुलसी ने लिखा है कि
कामतगिरि भे राम प्रसादा
अवलोकत आप हरत विषादा।
कामतानाथ पर्वत में तीर्थ यात्रियों को संतो को ऋषियों को और आसपास के गांव में रहने वाले लोगों और तीर्थ यात्रियों को #पेयजल संकट से बचाने के लिए पेशवा कालीन राजाओं तथा चित्रकूट आने वाले राजाओं महाराजाओं के अलावा - समाज ने भी तालाबों का निर्माण किया था।
चित्रकूट के 10 किमी परिधि में समाज द्वारा बनाए गए तालाबों के बारे में स्थानीय ज्ञान प्राप्त किया -जो निम्न
अनुसार है--
#बड़ातालाब -
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कामदगिरि पर्वत के पश्चिम करीब 500 मी
दूरी कोई भरतकूप तिराहे से दक्षिण पश्चिम कोने पर बड़ा तालाब है । तालाब को बहुत ही सुंदर ढंग से बनाया गया था। उसके लंबे चौड़े भीटे थे। चारों ओर वृक्ष लगे थे। बताते हैं इस तालाब को रौली गांव के किसी जमींदार ने बनाया था।
इस तालाब में बरसात की बूंदे कामद की पर्वत
लक्ष्मण पहाड़ी से एकत्र होते हुए तालाब में जमा होती थी। तालाब को भर देती थी। पुराने लोग बताते हैं कि यह तालाब कभी सूखता नहीं था। इस तालाब से आसपास के गांव के लोगो तीर्थ यात्रियों को पर्याप्त पेयजल एवं दैनिक उपयोग के लिए पानी मिलता था। यह तालाब राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है।
वर्तमान स्थिति -
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आजादी के बाद से ग्राम पंचायत और विकास अधिकारियों ने तालाब के स्वरूप को विकास के नाम पर बर्बाद कर दिया है। तालाब के अंदर से सड़क निकाल दी गई। बरसात का पानी जिन रास्तों से आता था उन रास्तों को ऊंचा कर दिया गया है। तालाब के भीटो / रास्तों पर ग्राम प्रधान और लेखपाल निर्माण कर दिया गया। आज तालाब नहीं भरता इतना ही नहीं वह सूख रहा है। इसी तालाब के अंदर पंचायत और सरकारने गौशाला भी बनाई है।
#बान तालाब
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मध्य पदेश कामतानाथ पर्वत से निकलने वाली सरयू जलधारा वहीं नीचे तालाब में विलुप्त हो जाती है और इसके बाद वह आधा किलोमीटर दूरी पर उत्तर प्रदेश के चितरा गोकुलपुर गांव से निकलती थी। धीरे-धीरे वह सरयू नदी बन जाती थी।
सरयू उद्गम नदी से करीब 500 मी उत्तर में बान तालाब अद्भुत तालाब समाज के द्वारा निर्मित किया गया था। यह तालाब राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। इस तालाब से चित्रकूट आने वाले तीर्थ यात्रियों को और आसपास के गांव को पीने पीने का पानी के साथ-साथ पशुओं और अन्य निस्तार के लिए पर्याप्त था।
वर्तमान स्थिति
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ग्राम पंचायत और राजस्व विभाग सभी ने मिलकर इस तालाब के चारों ओर पक्के निर्माण कर दिए हैं। आज यह तालाब सड़क से दिखता नहीं है। इस तालाब के अंदर बरसात के पानी आने का जो रास्ता था उसे रास्ते में मकान बन गए हैं । मकान का पानी शौचालय की नालियां सब इसी में लगा दी गई है इतना ही नहीं नगर पालिका के द्वारा इस तालाब के आसपास जो बस्ती है उसका पानी भी इसमें डाल दिया गया है। यह तालाब आज बदबू मार रहा है और भूगर्भ जल को दूषित करने वाला बन गया है।
अभिमन्यु भाई